वादें तो सरकार का जुमला है, चुनाव से पहले रोजगार देंगे, सड़क देंगे, किसानो की मदद करेंगे लेकिन चुनाव के बाद सरकार के वादे और सड़के कहाँ गायब हो जाती है कुछ पता ही नहीं लगता |
सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील के मधुकर पुर गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का फैसला लिया है। ग्रामीण गांव की सड़क ना बनने से नाराज हैं । उन्होंने गांव के बाहर "रोड नहीं तो वोट नहीं" का बैनर लगा दिया है।
वोट बहिष्कार का नारा लगा रहे यह युवक स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से खासा नाराज हैं। इनकी नाराजगी की वजह गांव को जोड़ने वाली एक सड़क है जो जगह-जगह टूटी और खस्ताहाल है । ग्रामीणों का कहना है कि इसको बनवाने के लिए उन्होंने जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई लेकिन पिछले 10 सालों से उनकी समस्या का समाधान करने कोई नहीं आया। इस दौरान कई चुनाव हुए और उम्मीदवारों के आश्वासन के बाद इनकी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। इसलिए विवश होकर उन्हें चुनाव बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा। ग्रामीणों का साफ-साफ कहना है कि जब तक सड़क नहीं बन जाती वह मतदान नहीं करेंगे। आपको बताते चले कि इस गांव में शत प्रतिशत आबादी बहुसंख्यक समाज की है जिसमें करीब 12 सौ वोटर हैं। इन के बहिष्कार के निर्णय के बाद कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव में अब तक नहीं पहुंचा है।
सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील के मधुकर पुर गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का फैसला लिया है। ग्रामीण गांव की सड़क ना बनने से नाराज हैं । उन्होंने गांव के बाहर "रोड नहीं तो वोट नहीं" का बैनर लगा दिया है।
वोट बहिष्कार का नारा लगा रहे यह युवक स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से खासा नाराज हैं। इनकी नाराजगी की वजह गांव को जोड़ने वाली एक सड़क है जो जगह-जगह टूटी और खस्ताहाल है । ग्रामीणों का कहना है कि इसको बनवाने के लिए उन्होंने जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई लेकिन पिछले 10 सालों से उनकी समस्या का समाधान करने कोई नहीं आया। इस दौरान कई चुनाव हुए और उम्मीदवारों के आश्वासन के बाद इनकी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। इसलिए विवश होकर उन्हें चुनाव बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा। ग्रामीणों का साफ-साफ कहना है कि जब तक सड़क नहीं बन जाती वह मतदान नहीं करेंगे। आपको बताते चले कि इस गांव में शत प्रतिशत आबादी बहुसंख्यक समाज की है जिसमें करीब 12 सौ वोटर हैं। इन के बहिष्कार के निर्णय के बाद कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि गांव में अब तक नहीं पहुंचा है।

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